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Showing posts from April, 2018

कसौटी पर मीडिया

                                                               आज सोशल मीडिया एक ऐसा मंच बन चुका है जहां हर व्यक्ति  अपनी भावनाएं खुले रूप से प्रकट कर सकते है। लेकिन यह स्वतंत्रता आज समाज में अंधकार फैलाने का भी काम कर रही है, क्योंकि भारत में लगभग बावन करोड़ लोग  सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं। आज सोशल मीडिया पर बहुत ही अभ्रद भाषा का प्रयोग किया जा ररहा है। किसी पार्टी के नेता का फोटो लगा कर कमेंट बाक्स में  ऐसी भाषा प्रयोग कर देते हैं कि कोई उसे पढ़ना सम्भव ही नहीं समझता है। किसी का फोटो लगाकर उस पर कोई गलत कमेंट करना मीडिया का दुरुपयोग है। संविधान के अनुसार हमारी स्वतंत्रता का अधिकार हमें किसी अन्य की स्वतंत्रता को नुकसान पहुंचाने का अधिकार नहीं देता है। इसके प्रति लोगों को जागरूक हो ना चाहिए, क्योंकि मीडिया समाज का एक ऐसा दर्पण है जो जागरुक करने  के साथ - साथ समाज को साक्षर भी बनाता है। मीडिया की विश्व...

युवाओ से छल

                           आज हमारी सरकारें बेरोजगार युवाओं को सबसे ज्यादा छल रही हैं। वे युवा ओ का भविष्य सवारने के लिए तमाम लुभावने वादे  करते रहते हैं लेकिन किसी पर अमल शायद ही करते हों अक्सर रोजगार के नाम पर विज्ञापन तो निकलता है लेकिन भर्तियों में पदों की संख्या ऊट के मुंह में जीरे के समान होती है। एक तरफ युवा इन नौकरियों के लिए कोचिंग फीस  जमा करते हैं तो दूसरी तरफ सरकार परीक्षा के नाम पर रंगदारी वसूलती है। फिर युवा परीक्षा देते है लेकिन सरकारों की गलतियों के कारण युवाओ को  अदालत के चक्कर काटने पड़ते हैं अदालत नियुक्ति पर पाबंदी लगा देती है। इतनी लंबी अवधि तक का समय लगने तक सरकारें  बदल जाती है और नई सरकार पिछले सरकार के वादों से मुकर  जाती हहै। फिर युवा आर्थिक शोषण के बाद लाचार खड़े नजर आते हैं। आखिर क्यों कर रही है सरकारें युवाओं के साथ इतना भद्दा मजाक? 

JAL HE JIVAN HAI

                                      garmiyo ka mosam suru hote hi desh k kuch state sukhe ki chapet me a jate hai. jab sukhe ke isthati aa jati h thabhi jal bachane k upaye sujhate hai aur tor tareke ki baat sarkar aur prasasan karne lagte hai jab garmi chali jati hai to sabhi log kaan aur ankhe band kar so jate hai. agar jal ko dusit aur barbad karne ka silsala uhi chalta rha to wah din dur nhi jab jal ki vikral samasya ane wali hai log saaf jal ki ek ek bund ko taras jainge wese bhi manav ne apne vikash ke leye prakartik vastuvo ka atyadhik dohan kiya hai. jal ke bina sichai kese hogi.?bharat  mein  jaha per garmiyo mein sukha aur barsat ke dino mein kuch state mein (ex-Bihar) pani hi pani dhekhane ko milta hai. sarkar aur prasasan barsati jal ko sabhalne k liye upai kare to girte jal leval ko kuch hadh tak roka ja sakta hai. bharat me girte bhujal ki samasya hai agar ye samas...

नशे का कारोबार

                                          देश के नौजवान तम्बाकू, अफीम, चरस,गांजा, भांग, शराब, हेरोइन और कोकीन जैसे मादक पदार्थों कीओर ज्यादा से ज्यादा आकर्षित हो रहे है। इन पदार्थों की खपत तेजी से बढ़ रही है। सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देकर अवैध रूप से भारी मात्रा मे इनका आयात हो रहा है। देश में  नशे  का कारोबार इस तरह फैल गया है किआए दिन लाखों रूपएके नशीले  पदार्थ पकड़ा जाता है। भ्रष्टाचारी नेताओं और पुलिस की मिलीभगत से ही यह कारोबार फल फूल रहा है। इसे फैलाने में महिलाओं का इस्तेमाल भी हो रहा है। नशे की इस चुनौती से निपटने के लिए परिवार, समाज, हमारी सरकारें, कानून  और मीडिया को आगे आना होगा  तभीएक अच्छे समाज की रचना की जा सकती है।