युवाओ से छल

                          
आज हमारी सरकारें बेरोजगार युवाओं को सबसे ज्यादा छल रही हैं। वे युवा ओ का भविष्य सवारने के लिए तमाम लुभावने वादे  करते रहते हैं लेकिन किसी पर अमल शायद ही करते हों अक्सर रोजगार के नाम पर विज्ञापन तो निकलता है लेकिन भर्तियों में पदों की संख्या ऊट के मुंह में जीरे के समान होती है। एक तरफ युवा इन नौकरियों के लिए कोचिंग फीस  जमा करते हैं तो दूसरी तरफ सरकार परीक्षा के नाम पर रंगदारी वसूलती है। फिर युवा परीक्षा देते है लेकिन सरकारों की गलतियों के कारण युवाओ को  अदालत के चक्कर काटने पड़ते हैं अदालत नियुक्ति पर पाबंदी लगा देती है।
इतनी लंबी अवधि तक का समय लगने तक सरकारें  बदल जाती है और नई सरकार पिछले सरकार के वादों से मुकर  जाती हहै। फिर युवा आर्थिक शोषण के बाद लाचार खड़े नजर आते हैं।
आखिर क्यों कर रही है सरकारें युवाओं के साथ इतना भद्दा मजाक? 

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